बैंकिग प्रतिसमाधान
ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों का अक्सर सम्पर्क होने के कारण गलतफहमियों का पैदा होना स्वाभाविक है । इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे कि ग्राहक और कर्मचारी दोनो मे से किसी एक को नियमों का ज्ञान न होना, दोनों में से एक का रुखा व्यवहार या कर्मचारियों में अपेक्षानुसार आदरपूर्ण व्यवहार की कमी आदि ।
अधिकांश शिकायतों का निवारण अगर शाखा प्रबन्धक या ग्राहक चाहें तो उसी समय हो सकता है लेकिन अगर दोनों पक्ष अड़ जायें तो लिखित शिकायतें उत्पन्न होती हैं । बैंकों के उच्चाधिकारी शिकायतों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं और ज्यादातर शिकायतों का निपटान ग्राहक की संतुष्टि के अनुसार कर दिया जाता है परन्तु जहां नीतियों को ही अनुचित माना जाए या तथ्यों पर विवाद हो तो शिकायतों का निपटान बैंक के बाहर ही हो सकता है ।
यदि ग्राहक की शिकायत किसी सूचना प्राप्ति से संबंधित है तो भारत सरकार ने इसके लिये "सूचना का अधिकार" अधिनियम बनाया है जिसके जरिये सूचना प्राप्त की जा सकती है । दूसरी शिकायतों के निवारण के लिये एक रास्ता तो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बनाई गई बैंकिंग लोक पाल योजना है और दूसरा जरिया है भारत सरकार द्वारा बनाया गया "उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम" ।
हमने इस कक्ष में संबंधित बैंकों को ग्राहकों की शिकायतों के प्रेषण की व्यवस्था की है । इसके अतिरिक्त "सूचना का अधिकार" अधिनियम "उपभोक्ता संरक्षण" अधिनियम तथा बैंकिंग लोकपाल योजना मूल रुप में उपलब्ध कराये गये हैं । पाठकों की सहायता के लिये इन अधिनियमों एवं योजना से संबंधित सलाह एवं खबरों को अलग से दिया गया है ।
आशा है कि यह कक्ष बैंकों से संबंधित शिकायतों के समाधान में आपकी सहायता करेगा । हमेशा की तरह आपकी आलोचनाओं एवं सुझावों का स्वागत है ।